ब्रेकिंग
अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री श्री... बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पटरीपार सिकोला भाटा सब्जी मार्केट में निगम की बड़ी कार्रवाई, नाली के ऊपर बने 35 से अधिक अवैध निर्माण... छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास
दुर्ग

रसमड़ा में वायु प्रदूषण को लेकर डॉ. प्रतीक उमरे ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की कड़ी कार्रवाई की मांग

दुर्ग। नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन और भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने रसमड़ा क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अध्यक्ष अमनदीप गर्ग से शिकायत की है। उन्होंने रसमड़ा के उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण को नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है। साथ ही, डॉ. उमरे ने वायु प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर कड़ी कार्रवाई की बात भी की है।

डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि रसमड़ा क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित धुएं का असर स्थानीय हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और एसटीएफ बघेरा तक फैल चुका है। इस प्रदूषण का स्तर “गंभीर” हो चुका है, जिससे क्षेत्र के निवासियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। रात के समय, फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं की बदबू के कारण लोगों के लिए छत पर टहलना और सांस लेना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बार-बार शिकायतें की हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इन फैक्ट्रियों से रोजाना भारी मात्रा में धुआं निकलता है, जिससे आसपास के इलाकों की वायु गुणवत्ता बिगड़ रही है और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। डॉ. उमरे ने आरोप लगाया कि फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने की आवश्यकता है, लेकिन प्रबंधन के दावे के बावजूद इन उपकरणों का प्रभावी तरीके से संचालन नहीं हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि इन फैक्ट्रियों में निम्न गुणवत्ता वाले ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे अत्यधिक मात्रा में कार्बन उत्सर्जित हो रहा है और वायु गुणवत्ता खराब हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 50 के भीतर रहता है तो यह सामान्य माना जाता है, लेकिन रसमड़ा में एक्यूआई लगातार बढ़ता जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

डॉ. उमरे ने प्रशासन के ढीले रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि आखिरकार कब तक इन फैक्ट्रियों को इस तरह बिना किसी सख्त कार्रवाई के प्रदूषण फैलाने की अनुमति दी जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button